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Saturday, March 6, 2010

फलाने-धमाके

"भाइयों और उनकी बहनों आज से आपका इंतज़ार खत्म हुआ..
पेस है बिलकुल नया और तीखा..फलाने-धमाके के किस्से जो आप को रोज परोसे जाएँगे...खुद भी खाएं और दूसरों को भी खिलाएं. बीच में पानी पीना सख्त मना है.....तो पेस है पहला निवाला........."
फलाने....
हाँ धमाके?
आज खाने में क्या खाया
दाल और चावल! क्यों..?
दाल मिल गयी तुझे,
मेरी धर्म पत्नी ने तो रोटी से ही काम चला दिया..
हाँ यार, बड़ी मुस्किल से आज उसने एक महीने बाद बनाया था.
यही हाल रहा तो, दाल खाने में अल्पसंख्क हो जाएगी.
हाँ महंगाई ने तो कमर तोड़ दी है,
खैर आज कोई शादी का कार्ड आया है, क्या ??
हाँ आया तो है मिश्रा जी के यहाँ से...
तो चलो यार ११ रूपये नेवता देंगे और १०१ का खाना खायेंगे.....
अब तो शादी में ही अच्छे खाने का भरोसा है,
ठीक फलाने....चलते हैं आज!!

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