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Friday, February 19, 2010

स्वित्ज़रलैंड की एक रात

रात के ११:३० बजे थे की मैंने जुरिच (स्वित्ज़रलैंड) की ट्रेन छोड़ी और लौसंने (स्वित्ज़रलैंड) स्टेशन पर उतर गया. पहली बार स्वित्ज़रलैंड घुमने गया था इसलिए मुझे रात में चलने वाली बस के बारें कुछ खास पता नहीं था. मैंने एक व्यक्ति से वहां पे चलनी वाली टैक्सी का नंबर लिया और टैक्सी करके अपने दोस्त के यहाँ जाने लगा.
हाँ जी कहाँ उतरना है आप को (हिन्दी रूपांतरण)
घर का नंबर क्या है ..
मैंने जेब से एक पेपर निकाल कर उसको पता बताया और फिर आराम से बैढ़ गया.
गलती से टैक्सी वाले ने मुझे घर के पीछे वाले रास्ते पर उतार दिया और फिर चलता बना. मैं कुछ देर वहीँ पर खड़ा रहा फिर धीरे-धीरे चलने लगा. उस समय रात के १२:२० हो रहे थे. कुछ देर चलने के बाद मुझे लगा की मैं रास्ता भूल गया हूँ. अब मेरे हाथ पैर कांपने लगे और साँस तो जैसे रुक ही गयी हो. कुछ समझ में नहीं आ रहा था की अब मैं अब क्या करूँ. रात और गहरी काली हो रही थी. ठंडी हवा के झोकों से मेरे सारे रोएँ खड़े हो गये, दिल तो ऐसे धड़क रहा था जैसे की मानों आज कुछ अनहोनी होने वाली है. मैंने कुछ हिम्मत बांधी और बगल के एक घर में घुस गया. काफी देर तक वहीँ खड़ा रहा फिर यह सोंच कर घंटी दबा दी की अगर कोई निकला तो पता पूँछ लेंगे. अन्दर से कोई जवाब नहीं आया और ना ही दरवाजा खुला. में उदास हो गया और लगा की अब सारी रात भटकते हुए ही गुजरेगी. फिर अचानक मेरे मन में विचार आया की हो सकता है की रात को कोई कुत्ते को शैर कराने निकला हो. मैं कुछ सोचे समझे बिना सीधा चलते चला गया. मेरी आँखों को विश्वास नहीं हो रहा था की ठीक मेरे सामने एक आदमी कुत्ते के साथ खड़ा हुआ था. अब क्या मैं उसकी तरफ तेजी से बड़ा और हांफते हुए उससे पता पूंछा. वो तुरंत बिना कुछ मुझसे पूछे, पता बताने लगा जैसे की वह मेरा ही इंतज़ार कर रहा हो.
थोड़ी देर वह व्यक्ति रुका फिर बोला मैं भी उधर जा रहा हूँ आप मेरे साथ आ जाओ. मैं उसकी बात का ना नहीं कर सका और और उसके साथ चलने लगा. उस व्यक्ति ने मुझे मेरे घर तक छोड़ा और फिर आगे निकल गया.
अब आप को मैं क्या कहूँ! उस दिन वह व्यक्ति मेरे लिए किसी भगवान से कम नहीं था या फिर भगवान ही थे जो मुझे मेरे किसी अच्छे  कर्म का फल देके चले गए.

6 comments:

  1. तेज प्रताप सिंह जी,
    वो आदमी सिर्फ सुर सिर्फ ईश्वर का भेजा हुआ दूत था जो आपके अच्छे कर्मों की वजह से आया था...
    ऐसी ही घटना मेरे पिता जी के साथ हुई जब वो मेरे पास कनाडा आये थे...ठण्ड और बर्फ , साथ ही सारे घर एक जैसे दीखते हैं वो रास्ता भूल गए...बेहोश होने ही लगे कि एक गोर औरत ने देखा वो अपने घर से कोम्फेर्टर और कम्बल लाकर आई, आस पास के लोगों को बुलाया सबने मिलकर उनको गर्म रखा अम्बूलंस आई और वो बच गए...
    अच्छा लगा आपको पढना...आप संगीतग्य भी हैं देख कर ख़ुशी हुई...मुझे भी गाने का शौक है सुनियेगा जब भी मौका मिले...मेरे ब्लॉग पर कुछ कराओके में गाये हुए फ़िल्मी गीत हैं...
    धन्यवाद...

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  2. होते है ऐसे अद्भुत संयोग भी.

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  3. अच्छा लगा आपको पढना...

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  4. बहुत सुंदर लगी आप की बात, अगर आंईदा आप को युरोप मै कोई ऎसी दिक्कत आये तो अपने मोबाईल से १०० ना० घुमा दे ओर आप पास किसी भी सडक का नाम ओर ना० उन्हे बता दे, अगर कुछ समझ मै ना आये तो बस पुलिस पुलिस चिल्लये फ़िर देखे,हेल्प भी चिल्लये, धयान रहे अपने आप की किसी जगह कि पहचान जरुर देवे.

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