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Monday, August 29, 2011

नीलम

अगर आज दीपक से कोई ये पूछे की अन्ना हरे या जीते तो शायद उसके पास कोई जवाब ना होगा पर आजादी की इस दूसरी लडाई ने उसको कहीं का ना छोड़ा, बचा तो सिर्फ खालीपन पर भीगी आँखें | सुबह के १० बजे थे जब नीलम की तबियत खराब हुई, दर्द इतना बुरा था की उसको तुरंत अस्पताल ले जाना पड़ा |  
आपातकालीन विभाग में दाखिल करना पड़ेगा हालत कुछ ठीक नहीं है यह कहकर डॉक्टर ने दीपक को आगे की तरफ इशारा किया. दीपक ने भर्ती की सारी प्रक्रिया पूरी की और डॉक्टर के आने का इंतज़ार करने लगा | अगले पल डॉक्टर आये और रक्त और पेसाब की जांच लिखकर दोबारा आने को बोलकर चले गए |
नीलम की हालत और खराब हो रही थी वह रह-रह कर दीपक-दीपक कर रही थी, इतने में डॉक्टर जांच की रिपोर्ट लेकर अन्दर दाखिल हुए और दीपक को ई. सी. जी. कराने को बोलकर चले गए. दीपक को कुछ समझ नहीं आ रहा था की डॉक्टर ने ई. सी. जी. के लिए क्यों बोला है, खैर वह डॉक्टर के कहे अनुसार सारी प्रक्रिया से गुजरने लगा |
दिन के १२ बज थे जब उसे रिपोर्ट मिली...........रिपोर्ट लेकर वो सीधे डॉक्टर के पास गया .....
सर जी कोई घबराने वाली बात तो नहीं है, डॉक्टर थोड़ी देर चुप रहे फिर बोले बड़े डॉक्टर का इन्जार करिए वो आते ही होंगे राम लीला मैदान से | दीपक हाँ में हाँ मिलाकर नीलम के पास जाकर बैठ गया, इतने में एक दूसरा डॉक्टर आया और नीलम को देखने लगा, दीपक ने पूछा बड़े डॉक्टर कब आयेंगे...कोई जवाब ना आया |
उधर नीलम की तबियत और बिगड़ रही थी, दीपक भी रह-रह कर परेशान हो रहा था और भगवान् को याद कर रहा था पर बड़े डॉक्टर के आने की कोई खबर ना थी.
सहसा नीलम जोर-जोर से सांसे लेने लगी ऐसा लग रहा था मानों अभी उसकी सांसे छूट जाएगी, आनन्-फानन में पास खड़ी नर्स ने डॉक्टर को फ़ोन लगाया पर कुछ संतोष जनक उत्तर ना मिला, दीपक दौड़ कर डॉक्टर कच्छ में गया और मदत के लिए प्रार्थना करने लगा पर  डॉक्टर ने बोला ये हार्ट प्रोबलम का केस है मैं नहीं देख सकता आप को हार्ट स्पेस्लिस्ट (बड़े डॉक्टर) का इंतज़ार करना होगा | दीपक भागता हुआ नीलम के पास आया वो बेसुध पड़ी थी उसने हाथ हिलाया पर नीलम को कुछ महसूस ना हुआ वह भाग कर फिर से डॉक्टर के पास गया | 
डॉक्टर के आने के बाद दीपक ने जो कुछ भी अपने कानों से सुना उसपर वह विश्वास नहीं कर पा रहा था की उसके जीवन की नीलम इन्द्रलीन हो गयी है और अब कभी नहीं आएगी |
दीपक ने हिम्मत बांधा और किस्मत की दुहाई मंजूर करते हुए नीलम को सर उठा कर अपने पैरों पर रख लिया और फिर टूट कर रोने लगा |

अभी ही तो लिए थे फेरे अभी से क्यों गए,  
हुई क्या खता जो तुम मुझसे हुए इतने परे |
अब कौन मुझे अपनी जामुनी बाँहों में डालेगा,
और करेगा रक्तिम नीलमी बरसात आंचल तले |
  
थोड़ी देर बाद बड़े डॉक्टर भी आ गए पर अब कोई फ़ायदा ना था क्योंकि नीलम तो अब बेचमक होकर अपनी जलते दीपक में विहीन हो चुकी थी | दीपक भी अपना प्रकाश खोने को है, ऐसा लग रहा की मानों यहाँ से आज एक नहीं दो सांसे अपना पथ परिवर्तन करने वाली हैं |
दीपक ने भले ही आजादी की दूसरी लडाई राम लीला मैदान से ना लड़ी हो पर वो उस मैदान का गवाह जरूर बनेगा |

Monday, August 15, 2011

मैं हूँ भारत माँ
तिरंगा लहराने आई हूँ |
सोये पड़े जंगी हथियारों में
फिर से धार लगाने आई हूँ ||
कहाँ गए वो वतन के प्यारे 
मर मिटते थे जो एक हुंकार पर,
खा लेते थे गोली सीने पर
आकर जंगे मैदान पर....
उन्हीं वतन के प्यारों को 
फिर जगाने आई हूँ...
और जो भूल गए हैं 
कीमत पावन आजादी की....
उनको उखाड़ फ़ेंक,
फिर नया देश बसाने आई हूँ ||
मैं हूँ भारत माँ,
तिरंगा लहराने आई हूँ |
सोये पड़े जंगी हथियारों में,
फिर से धार लगाने आई हूँ ||

"तेज"

Tuesday, August 2, 2011

हमने देखी ना थी चंचलता उनकी इस अदा में,
जिसका ढाल बना वो मेरा दिल ले गए,
पहले तो हम कभी-कभी मरा करते थे,
आज तो वो मेरी हर सांस को ही कत्ल कर गए |   

आकर अपने बाजुओं में मुझे सुलाया करते थे,
जाते-जाते माथे पर हाथ भी फिरा दिया करते थे,
पर जबसे उन्होंने चुराया मेरा दिल इन अदायों से,
आना तो दूर गाहे बगाहे मेरा हाल भी पूछना भूल गए | 




"तेज"

Monday, August 1, 2011

सावन

सावन की इन बरसती बूंदों में,
संध्या स्पर्श में कुंठित सरस को तरसे,
सूरज तरसे लालिख लालिमा को,
भोर अपनी रात की ओस को तरसे,
दिन तरसे बादलों की अटखेलियाँ,
और, इन मिश्रित उमंगो की बहारों में,
मेरा पुष्पित मन तरसे पिया मिलन को|