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Monday, October 25, 2010

"भारत-यास्क"

आज आप जो यहाँ पढेंगे वो मेरे द्वरा लिखी जाने वाली पुस्तक के कुछ अन्स है, प्रोत्साहन सर्वोपरी.....

हजारों समय काल गये बीत,
तब धरा पर सत्य आया है,
मानवता के खातिर सर्वग्य लुटाने,
"भारत-यास्क" आया है...

अखंड भारत का जिसका है स्वप्न,
जननी-जन सेवा जिसका है धर्म,
अनीति पर नीति की विजय दिलाने,
"भारत-यास्क" आया है...

सभी को मिले न्याय का अधिकार,
जहाँ हो सुख समृधि, ना कोई विकार,
करने एसे एक नये युग की शुरुवात,
"भारत-यास्क" आया है...

"तेज"

आज उसने ना पूछा हाल मेरा....."तेज"

आज उसने ना पूछा हाल मेरा
कैसे हो, कैसी कटती हैं रातें,
क्या खाया, गये थे कहाँ आज,
भूल से गये सारे सवाल उनको.........
पहले तो हर पल की खबर रखते थे,
हर पहलू में खोजा करते थे मुझको,
हर एक आहट पर सहम जाया करते थे......
उन्ही की सांसों में बसा करती थी मेरी सांसे,
आँखों की पुतली में रौशनी बनकर रहते थे,
हुआ क्या जो वो रूठ गये मुझसे,
चले गये क्यों छोड़, मुझे मेरे इस हाल में.............

"तेज"

Tuesday, October 19, 2010

चाहता हूँ,..........तेज`

अपनी आँखों में उनकी सूरत उतारना चाहता हूँ,
बंद पड़ी किताब को फिर से खोलना चाहता हूँ,
पन्ने जो छूट गये थे बिना पढ़े,  
उन्हीं को आज फिर से पलटना चाहता हूँ । 


उनके प्यार की झांकी फिर से देखना चाहता हूँ,
दिल में बने घर को फिर से खोलना चाहता हूँ,
रंगोली जो छूट गयी थी बिना रंगों के,
उन्ही को आज फिर से सजाना चाहता हूँ । 


उनकी नाजुक अदाओं में खुद को डुबोना चाहता हूँ,
नुक्कड़ पर बनी मधुशाला फिर से खोलना चाहता हूँ,
कहीं बीत ना जाये जवानी के ये पल,
इसी डर से मुहब्बत का एक और घूँट पीना चाहता हूँ । 

`तेज`