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Tuesday, August 3, 2010

मंजिल

हर एक पल को जियो जी भर के
सपनों पर अपनी लगाम नहीं होती,
आने वाले कल को देख लो आज
पीछे देखना विजेता की पहचान नहीं होती।

गर्व से सर उठा कर चलो
हीरे की कोई पहचान नहीं होती,
जीत जाओगे जीवन के इस शफर में
बिना उड़े परिंदे की पहचान नहीं होती।

मुश्किलों से तुम घबराना नहीं
किस्मत किसी की गुलाम नहीं होती,
जब तक गिरकर उठ ना जाओ
मंजिल की सही पहचान नहीं होती।

4 comments:

  1. बहुत सुंदर संदेश दिया आप ने अपनी रचना मे

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  2. आने वाले कल को देख लो आज
    पीछे देखना विजेता की पहचान नहीं होती।
    Bahut khoob! Par shayad jeetaa hua yaa haaraa hua,har wyakti kabhi na kabhi mud ke dekhta zaroor hai,hai na?

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  3. बहुत अच्छा सन्देश देती रचना

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  4. सुन्दर और सार्थक लगे
    आपके विचार ।

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