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Sunday, August 1, 2010

आया हूँ आज तो कुछ लिख के जाऊंगा

आया हूँ आज तो कुछ लिख के जाऊंगा 
यादों को शब्दों में पिरो के जाऊंगा
भूल ना जाऊं उनके चेहरे की तासीर 
इसलिए महफ़िल को आज जगा के जाऊंगा ।

बजा दो तालियाँ मेरे इन शब्दों पर 
पी लो मुहब्बत के दो चार घूँट
आया हूँ आज मैं बहुत दिन बाद
तो प्रेम में डुबकी लगवा के जाऊंगा ।

टूटे दिल में आश जगाने की खाई है कशम
उजड़े प्यार को बसाने की ठानी है मैंने 
उदास चेहरे पर आ जाये फिर से मुस्कुराहट  
इसलिए दिल में एक और गुदगुदी उठा के जाऊंगा ।

महबूब की दोनों आँखों में डूब जाओ
भुला दो दूनिया की ग़मों रंजिश 
भीग जाये तेरा तन मन उनके प्रेम में 
इसलिए आज मुहब्बत की बारिश करा के जाऊंगा ।

तेज 

2 comments:

  1. बहुत खुब जी बहुत ही सुंदर रचना,आया हूँ आज तो कुछ लिख के जाऊंगा, आप को धन्यवाद दे कर ही जाऊंगा!!

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  2. उदास चेहरे पर आ जाये फिर से मुस्कुराहट
    इसलिए दिल में एक और गुदगुदी उठा के जाऊंगा ।
    Oh! Sundar!

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