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Sunday, April 25, 2010

घाव से भरा पत्र.........................

दर्द और यादों का समेटा है
हर पल का लुटता सवेरा है
घाव से भरा पत्र.... 
जो उसने आज माँ को भेजा है

निकालो मुझे इस अन्धकार से बाहर 
की सवेरा भी अब मुंह छिपाने लगा है
मैं और जिन्दा रह नहीं सकती 
बिना वजह आसुओं के घूँट 
पी नहीं सकती.....
बाबा को जल्दी भेजो यहाँ 
उनकी लाडली जिन्दा रहते अब और 
मर नहीं सकती.....
अरमानो के झूले पर अभी है उड़ना मुझे 
की इतनी जल्दी मैं एक ढेला जहर का 
खा नहीं सकती.....

एक-एक करके बिक रहे हैं सारे सपने 
जिंदगी का दिया भी अब बुझने लगा है
इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं माँ की 
दहेज का तेल अब चुकने लगा है........

तेज प्रताप सिंह 'तेज'

10 comments:

  1. bahut sahi janaab aankhein nam ho gayi......
    kuch aisa hi likha tha padhiyega....

    http://dilkikalam-dileep.blogspot.com/2010/04/blog-post_908.html

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  2. Dahej ke abhishaap se mukti ke liye yuvaon ko sakht kadam uthane hi honge.. apne mata-pita ko samjhana hoga..

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  3. एक-एक करके बिक रहे हैं सारे सपने
    जिंदगी का दिया भी अब बुझने लगा है
    इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं माँ की
    दहेज का तेल अब चुकने लगा है.......

    अंतिम पंक्तियाँ दिल को छू गयीं....... बहुत सुंदर कविता....

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  4. अच्छी लगी आपकी कवितायें - सुंदर, सटीक और सधी हुई।

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  5. दहेज अभिशाप है...

    बहुत सटीक रचना.

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  6. एक-एक करके बिक रहे हैं सारे सपने
    जिंदगी का दिया भी अब बुझने लगा है

    इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं माँ की
    दहेज का तेल अब चुकने लगा है........
    ... samvendana se paripurn maarmik rachna ....
    Bahut dukh hota hai ki aaj bhi Dahej ka danav Sursa sa muuhn faade jagah gagah maujod hai....
    Aapko Bahut shubhkamnayne..

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  7. बेहद सशक्त और सटीक.

    रामराम.

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  8. ek behad sashkt avam prabhav chodne wali kavitaएक-एक करके बिक रहे हैं सारे सपने
    जिंदगी का दिया भी अब बुझने लगा है
    इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं माँ की
    दहेज का तेल अब चुकने poonam
    लगा है

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  9. उनकी लाडली जिन्दा रहते अब और
    मर नहीं सकती.....uf! Kitni vedna hai...

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